Awareness program under 'Save Farm Campaign' in Jasoli Patti
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| Awareness program under 'Save Farm Campaign' in Jasoli Patti |
उर्वरक प्रबंधन, जीरो-टिल तकनीक, रबी फसलों की उन्नत किस्मों और पशुपालन पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी, किसानों के बीच पौधों का भी हुआ वितरण।
लोकल पब्लिक न्यूज | पूर्वी चम्पारण | कोटवा।
पूर्वी चम्पारण जिले के कोटवा प्रखंड अंतर्गत जसौली पट्टी गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, पिपराकोठी, मोतिहारी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा टिकाऊ खेती के वैज्ञानिक तरीकों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में गांव के लगभग 50 से 55 महिला एवं पुरुष किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जैविक खाद के महत्व, उन्नत बीजों के चयन और फसलों को कीट एवं बीमारियों से बचाने के उपायों की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने कहा कि खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए मिट्टी के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
किसानों को मिट्टी बचाने के बताए व्यावहारिक उपाय
कार्यक्रम की शुरुआत प्राकृतिक खेती के मास्टर ट्रेनर रवींद्र सिंह द्वारा अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता विनय कुमार ने अतिथियों का अभिनंदन किया और जसौली पट्टी गांव के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।
किसानों को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने खेतों की मिट्टी को बचाने और उसकी उर्वरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिट्टी कृषि उत्पादन का प्रमुख आधार है। यदि मिट्टी का स्वास्थ्य खराब होता है, तो इसका सीधा असर फसलों की पैदावार और खेती की लागत पर पड़ सकता है।
उन्होंने किसानों को रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने तथा जैविक खाद और अन्य उपयुक्त उर्वरक स्रोतों के समन्वित इस्तेमाल के व्यावहारिक तरीके बताए। उन्होंने मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और उसकी उर्वरता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने पर बल दिया।
मिट्टी का नमूना लेने और ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाने की जानकारी
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. विजय सिंह मीना ने अभियान की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेत से मिट्टी का नमूना लेने की विधि समझाई, ताकि मिट्टी की जांच के आधार पर फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का उचित प्रबंधन किया जा सके।
उन्होंने खेतों में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा बढ़ाने के उपायों पर भी विस्तार से जानकारी दी। साथ ही बताया कि मिट्टी की जांच और उसके पोषक तत्वों की स्थिति को समझकर उर्वरकों का इस्तेमाल करना खेती की उत्पादकता और लागत प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
जीरो-टिल तकनीक से समय और लागत बचाने पर जोर
डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने किसानों को रबी फसलों की उन्नत किस्मों के चयन और समय पर बुआई के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने विशेष रूप से धान की कटाई के बाद जीरो-टिल मशीन के माध्यम से बिना पारंपरिक जुताई किए सीधे बुआई करने की तकनीक समझाई।
उन्होंने बताया कि इस तकनीक को अपनाने से खेत की तैयारी में लगने वाले समय और लागत को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, फसल की बुआई समय पर करने का अवसर मिलता है। विशेषज्ञों ने किसानों को स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।
पशुपालन और नस्ल सुधार पर भी मिला मार्गदर्शन
कार्यक्रम में डॉ. पंच किशोर भारती ने पशुपालन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने गाय, भैंस और बकरियों के उचित रखरखाव, स्वास्थ्य प्रबंधन तथा नस्ल सुधार के बारे में किसानों को जागरूक किया।
उन्होंने पशुओं की देखभाल, उनके स्वास्थ्य पर ध्यान देने और बेहतर पशुपालन प्रबंधन अपनाने की आवश्यकता बताई। विशेषज्ञों ने पशुपालन को किसानों की अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण साधन बनाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी।
फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने के बताए तरीके
डॉ. नवीन बी. पाटिल ने फसलों और पौधों में लगने वाले प्रमुख कीट-पतंगों तथा बीमारियों की पहचान करने के तरीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करने और कीट एवं रोगों के नियंत्रण के लिए समेकित प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने की जानकारी दी।
उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से कीटों और बीमारियों की पहचान कर समय पर उचित उपाय करने के महत्व को समझाया, ताकि फसलों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
किसानों के बीच पौधों का वितरण
कार्यक्रम के दौरान वन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए पौधों का अतिथियों के हाथों किसानों के बीच वितरण किया गया। इस पहल के माध्यम से पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में पारस नाथ सिंह, केशव प्रकाश, रजीव रंजन, उपेंद्र कुमार सिंह, पैक्स अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, रंजन कुमार, प्रभात रंजन, सुनील कुमार दास, मोहन साह, उमेश नारायण सिंह, लालबाबू सिंह, रमाशंकर ठाकुर, गौरीशंकर ठाकुर तथा आचार्य धर्मेंद्र चतुर्वेदी सहित दर्जनों प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।
वैज्ञानिक खेती अपनाने का संदेश
जसौली पट्टी में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को खेती में वैज्ञानिक तकनीकों के इस्तेमाल, मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, उन्नत फसल उत्पादन और पशुपालन को बेहतर बनाने की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को जागरूक कर कृषि उत्पादन को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में प्रोत्साहित करना रहा।
